सर्दियों में होता है फेशियल परैलिसिस का खतरा, जानिए इस बीमारी के बारे में

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सर्दी के मौसम में होने वाली कई बीमारियां ऐसी हैं जिनके बारे में आम लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। ऐसी ही एक बीमारी है बेल्स पाल्सी या फेशियल परैलिसिस (लकवे के कारण चेहरा टेढ़ा होना)। इस बीमारी का नाम स्कॉटलैंड के सर्जन चार्ल्स बेल (1774-1842) के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने चेहरे की बिगड़ती अवस्था का पहली बार जिक्र किया था। बेल पाल्सी ऐसी स्थिति है जो चेहरे की मांसपेशियों की कमजोरी या अस्थायी पक्षाघात (परैलिसिस) का कारण बनती है। यह तब होता है जब चेहरे की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसों में सूजन आ जाए या वे सिकुड़ जाएं। ठंड में बेल्स पाल्सी के लक्षण एक से दो सप्ताह के बाद विकसित हो सकते हैं। इसकी शुरुआत कान में दर्द या आंखों में संक्रमण से होती है। इस स्थिति को तब महसूस किया जा सकता है जब मरीज सुबह उठता है या जब खाने या पीने की कोशिश करता है।

एम्स के डॉ. नबी वली के अनुसार, बेल्स पाल्सी में चेहरे का एक तरफ का हिस्सा मुरझाया या लटका हुआ दिखाई देने लगता है। मरीज एक तरफ से ही हंस पाता है। यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है।

बेल्स पाल्सी के लक्षण

खाने-पीने में कठिनाई

चेहरे के भाव बनाने में कठिनाई, जैसे- मुस्कुराना

चेहरे की कमजोरी

चेहरे की मांसपेशियों में खिंचाव

आंख और मुंह में सूखापन

सिरदर्द

आंख की जलन

 क्यों होती है बेल्स पाल्सी

डॉ. नबी वली बताते हैं कि यूं तो इस बीमारी के स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं है, लेकिन अक्सर वायरल इन्फेक्शन के कारण ऐसा होता है।

बेल्स पाल्सी के जिम्मेदार वायरस/बैक्टीरिया –

हर्प्स सिंप्लेक्स, जो ठंड में घावों और जननांग दाद का कारण बनता है।

एचआईवी, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है।

सारकॉइडोसिस, जो अंगों की सूजन का कारण बनता है।

हरपीज जोस्टर वायरस, जो चिकनपॉक्स और दाद का कारण बनता है।

एपस्टीन-बार वायरस, जो मोनोन्यूक्लिओसिस का कारण बनता है।

लाइम रोग, जो संक्रमित टिक्स के कारण होने वाला एक जीवाणु संक्रमण है।

ठंड में ज्यादा होता है बेल्स पाल्सी का खतरा

बेल्स पाल्सी का खतरा ठंड में ज्यादा होता है, क्योंकि इसी मौसम में फ्लू या जुकाम का खतरा अधिक होता है। डॉ. नबी वली बताते हैं कि डायबिटीज के मरीजों और गर्भवती महिलाओं में बेल्स पाल्सी का जोखिम अधिक होता है। परिवार में पहले किसी को है तो अन्य सदस्यों को भी हो सकती है। आमतौर पर इसके लक्षण 6 माह या इससे पहले दूर हो जाते हैं, लेकिन  कई बार बीमारी लौटकर भी आ जाती है।

बेल्स पाल्सी का इलाज

डॉ. नबी वली के अनुसार, इलेक्ट्रोमायोग्राफी और इमेजिंग स्कैन की मदद से बेल्स पाल्सी का पता लगाया जाता है। बीमारी की पुष्टि होने के बाद डॉक्टर इलाज तय करता है। हालांकि ज्यादातर मरीज अपने आप ठीक हो जाते हैं। इस बीमारी का कोई खास इलाज नहीं है, इसलिए डॉक्टर लक्षणों को दूर करने के लिए दवा या थैरेपी की सलाह देते हैं।

दवाओं से इलाज

कोर्टिकोस्टेरोइड ड्रग्स, जो सूजन को कम करतीं हैं।

वायरस या बैक्टीरिया के कारण बेल्स पाल्सी होने पर एंटीवायरल या जीवाणुरोधी दवा।

ओवर-द-काउंटर दर्द दवाएं, जैसे इबुप्रोफेन या एसिटामिनोफेन, जो दर्द को दूर करने में मदद कर सकती हैं।

आंख की दवा।

घरेलू इलाज

दर्द से राहत के लिए चेहरे पर सिकाई

चेहरे की मालिश

चेहरे की एक्सरसाइज

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/disease/bells-palsy

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं।

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