सावधान! डेंगू के मरीज हो रहे डिप्रेशन और घबराहट के शिकार

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डेंगू के मरीजों को मनोरोग सता रहा है। डेंगू बीमारी का खौफ और इलाज में अनदेखी का एहसास इन्हें डिप्रेशन (अवसाद) और एंजाइटी (घबराहट) का शिकार बना रहा है।

मायागंज अस्पताल के मनोरोग चिकित्सकों की मानें तो डेंगू के मरीजों में साइकोसिस (असामान्य व्यवहार) का लक्षण भी दिख रहा है। इस तरह के मरीजों की संख्या डेंगू से होने वाली मौतों की खबरें जनसामान्य के बीच पहुंचने के बाद तेजी से बढ़ी हैं। मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार भगत बताते हैं कि मनोरोग ओपीडी में हर रोज एंजाइटी और डिप्रेशन के तीन से चार ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिन्हें या तो डेंगू की बीमारी होती है या फिर एक सप्ताह के अंदर डेंगू से ठीक हुए हैं। उधर, मरीजों का कहना है कि डेंगू होने के साथ ही उन्हें मौत का डर सताने लगा है।

भर्ती के दौरान जांच-इलाज में जरा सी देरी पर घबराहट और टेंशन होने लगती है। लगता है कि कहीं इलाज के अभाव में उनकी जान न चली जाए। यहीं चिंता उन्हें डिप्रेशन और एंजाइटी का शिकार बना रही है।

आंकड़े बताते हैं कि चार सितंबर से अब तक मायागंज अस्पताल में 236 कन्फर्म डेंगू (एलिजा टेस्ट में कन्फर्म डेंगू) व 1450 से अधिक संदिग्ध डेंगू(एनएस1एजी जांच में डेंगू पॉजीटिव) मरीजों का इलाज हो चुका है। इनमें से 225 से अधिक मरीजों में डिप्रेशन, एंजाइटी और साइकोसिस के लक्षण पाए गए। ये वहीं आंकड़े हैं जो कि मनोरोग विभाग के ओपीडी में पहुंचे। मेडिसिन विभाग के वरीय फिजिशियन डॉ. अंजुम परवेज बताते हैं इलाज के दौरान संदिग्ध और कन्फर्म डेंगू के करीब पांच प्रतिशत मरीजों में डिप्रेशन, एंजाइटी व साइकोसिस के लक्षण मिले हैं।

एंजाइटी के लक्षण
– ज्यादा चिंता करना, चिड़चिड़ापन, मांसपेशियों में तनाव
– उत्तेजित होना, दिल का तेजी से धड़कना, पसीना आना, मुंह सूखना
– थकान होना, ध्यान केंद्रित न होना

डिप्रेशन के लक्षण
– उदासी, थकान, दुखी और गुस्सा आना
– हताशा, अत्यधिक नींद या नींद का न आना
– दूसरों से अलग रहना, बैचेनी, स्पष्ट रूप से निर्णय लेने में परेशानी
– अपराधबोध होना, मन में आत्मघाती विचारों का आना

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