प्रदूषण: दिल्ली में ऑर्ड-ईवन का आज आखिरी दिन, बादलों के कारण बढ़ी धुंध

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दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार को भी प्रदूषण का प्रकोप जारी है। आसमान में बादलों के कारण बनी धुंध (स्मॉग) ने मुसीबत बढ़ा दी। इस कारण वायु गुणवत्ता और खराब हो गई। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार से लोगों को प्रदूषण से थोड़ी राहत मिल सकती है। वहीं दिल्ली में आज (शुक्रवार) से ऑर्ड ईवन खत्म हो रहा है जो चार नवंबर से शुरू हुआ था। उधर, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के प्रकोप के चलते स्कूल भी दूसरे दिन बंद हैं। 

जानें कहां कैस है एयर क्वालिटी
– केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, आईटीओ में प्रमुख प्रदूषक पीएम 2.5 489 (गंभीर श्रेणी) में है।
– लोधी गार्डन में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी हुई है।
– गाजियाबाद और नोएडा में वायु की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी हुई है। 
– वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बागपत में ‘गंभीर’ श्रेणी में 434 पर है।
– हरियाणा: स्मॉग ने शहर को अस्त-व्यस्त कर दिया क्योंकि गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता बिगड़ गई।

हवाएं चलेंगी : मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अब चक्रवाती हवाएं चलनी शुरू होंगी। इससे हालात में सुधार आएगा। दिल्ली की हवा साफ होने में दो दिन का समय लग सकता है।

आबोहवा और खराब : गुरुवार को प्रदूषण के स्तर में और बढ़ोतरी दर्ज की गई। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक बुधवार को औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 456 था जो गुरुवार को 463 अंक पर पहुंच गया। इस स्तर की वायु गुणवत्ता को ‘गंभीर +’ श्रेणी में रखा जाता है। दिल्ली के ज्यादातर हिस्सों में यही श्रेणी कायम है।

दिल्ली में मौसम का तीसरा सबसे प्रदूषित दिन
दिल्ली में गुरुवार मौसम का तीसरा सबसे प्रदूषित दिन (463 एक्यूआई) रहा। इससे पूर्व 1 नवंबर को एक्यूआई 484 व 3 नवंबर को 494 रहा था।
 
क्यों : धूप नहीं, हवा की रफ्तार भी कम रही 
प्रादेशिक मौसम पूर्वानुमान केन्द्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव के मुताबिक आसमान के ऊपरी स्तर पर बादल छाए हुए हैं। धूप नहीं होने व हवा की रफ्तार कम होने के चलते प्रदूषण कणों का बिखराव बहुत धीमा है। इसलिए प्रदूषण की परत वातावरण में बनी हुई है।
 
नोएडा-गाजियाबाद संयुक्त रूप से देश के सबसे प्रदूषित शहर नोएडा और गाजियाबाद संयुक्त रूप से देश के सबसे प्रदूषित शहर रहे। दोनों जगह एक्यूआई 486 दर्ज किया गया। दूसरे नंबर पर ग्रेटर नोएडा प्रदूषित (467) रहा।

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