इन 8 शहरों में दिवाली पूजन का ये रहेगा शुभ मुहूर्त

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दीपावली शब्द दीप और आवली दो शब्दों से मिलकर बना है। दीप का अर्थ होता है दीपक और आवली का अर्थ होता है पंक्ति। जिसका अर्थ निकलता है दीपों की पंक्ति। दीपावली का त्योहार हर साल  कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 27 अक्टूबर यानी आज मनाया जाएगा। इस वर्ष दिवाली एक खास संयोग लेकर आ रही है। लगभग पचास साल बाद दिवाली पर रविवार को लक्ष्मी योग बन रहे हैं। विद्या, बुद्धि, विवेक, धन, धान्य, सुख, शांति और समृद्धि के मंगलयोग के बीच देवी भगवती का आगमन होगा। सायंकालीन दिवाली पूजन के लिए इस बार डेढ़ घंटा प्राप्त होगा लेकिन दिन में कारोबारी दृष्टि से दिवाली पूजन के कई मुहूर्त हैं। आइए जानते हैं किस शहर में क्या रहेगा दीवाली पूजन का शुभ मुहूर्त।

कहां क्या पूजन का समय-
दिल्ली : सायं 6.43 से 8.14 बजे तक
लखनऊ : सायं 6.32 से 8.01 बजे तक
नोएडा-गाजियाबाद : 6.43 से 8.14 बजे
गुरुग्राम : सायं 6.45 से 8.15 बजे तक
फरीदाबाद : सायं 6.43 से 8.14 बजे तक
मेरठ : सायं 6.41 से 8.12 बजे तक
देहरादून : सायं 6.37 से 8.09 बजे तक
पटना/ रांची : सायं 6.17 से 7.44 बजे

दो विशेष मुहूर्त
-सायं 6.42 से 8.37 बजे तक ( वृषभकाल) ’   प्रात: 10.26 से दोपहर 12.32 बजे तक (धनु लग्न)

महानिशा पूजन (काली)
मध्यरात्रि उपरांत 1.15 से 3.25 बजे तक (सिंह लग्न)
(ज्योतिषाचार्य विभोर इंदुसुत, पंडित विष्णु दत्त शास्त्री, पंडित सुरेंद्र शर्मा, पंडित आनंद झा)

पूजन कैसे करें-
-लक्ष्मी जी की अकेले पूजा नहीं करनी चाहिए वरन श्रीनारायण के साथ करें
-लक्ष्मी जी की पूजा उनके गरुड़ पर सवारी का ध्यान करके करें

इस क्रम में करें पूजा-
सर्वप्रथम गुरु ध्यान, गणपति, शिव, श्रीनारायण, देवी लक्ष्मी, श्रीसरस्वती, मां काली, समस्त ग्रह, कुबेर, यम और शांति मंत्र।

व्यापारी वर्ग यह करें-
व्यापार वृद्धि के लिए 5 कौड़ी 5 कमलगट्टे देवी को अर्पित करें।

क्या करें-
लक्ष्मी जी को अनार और कमल पुष्प अवश्य चढाएं

यह पाठ करें-
कनकधारा, देवी सूक्तम ( 5 या 11 बार), श्रीसुक्तम ( 5 या 11 बार), श्रीलक्ष्मी सहस्त्रनाम, विष्णु सहस्त्रनाम, श्रीदुर्गा सप्तशती का पांचवा या 11 वां अध्याय। नील सरस्वती स्तोत्र
(विद्यार्थियों के लिए), गणपति के लिए संकटनाशन स्तोत्र

मंत्र प्रतिष्ठान और खाता-बही पूजन- 
ऊं श्रीं ह्रीं नम:
धन प्राप्ति
ॐ ह्रीं श्रीं श्रीं महालक्ष्मी नम:
विद्या प्राप्ति
ॐ ऐं

व्यापार वृद्धि- 
ॐ गं गं श्रीं श्रीं श्रीं मातृ नम:
लक्ष्मी पूजन
ऊं सौभाग्यप्रदायिनी, रोगहारिणी, कमलवासिनी, श्रीप्रदायिनी महालक्ष्मये नम: 11 बार अवश्य पढ़ें

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