नए कानून से कहां आई बेरोजगारी और क्यों

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यह चंद उदाहरण है। जिन्होंने कई माह पहले ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया। किसी का डीएल नवीनीकरण का आवेदन था, किसी ने पता बदलवाने के लिए आवेदन किया था। किसी ने अस्थाई डीएल को स्थाई डीएल के लिए आवेदन किया। सभी आवेदकों ने आरटीओ कार्यालय जाकर औपचारिकताएं पूरी की। आश्वासन दिया गया कि दस दिन के भीतर डीएल बनकर डाक से आपके घर पहुंच जाएगा।

बावजूद कई माह गुजरने के बाद भी आज तक लाइसेंस घर नहीं पहुंचे। नतीजा लाइसेंस के इंतजार में गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर बेरोजगार हो गए। गाड़ी मालिक ने बगैर डीएल गाड़ी चलाने से मना कर दिया। लखनऊ समेत प्रदेश भर में ऐसे बगैर डीएल हजारों ड्राइवर बेरोजगार होकर परिवहन आयुक्त मुख्यालय का चक्कर लगा रहे है। और अधिकारी फर्जी आश्वासन देकर उन्हें उल्टे पांव वापस भेज दे रहे है।

एक लाख लाइसेंस केएमएस के इंतजार में: रोजाना प्रदेश भर में जहां सात से आठ डीएल आवेदन होते थे वहीं इन दिनों इनकी संख्या दोगुनी हो गई। ऐसे में एक लाख डीएल का केएमएस (की-मनैजमेंट सिस्टम) के जरिए कम्प्यूटर पर ब्योरा दर्ज होने के बाद डीएल डाक से भेजा जाएगा।

क्या कहते है जानकार
लगातार छुट्टी पड़ने की वजह से काफी संख्या में लाइसेंस डाक से नहीं पहुंच पाए है। एक लाख के करीब डीएल का ब्यौरा दर्ज होना बाकी है। वहीं जो डीएल डाक से लौट आए है उन्हें इसी माह संबंधी आरटीओ कार्यालय भेज दिया जाएगा। विनय कुमार सिंह अपर परिवहन आयुक्त (आइटी)

केस एक
नाम जगराम है। ट्रक ड्राइवर है। डीएल नवीनीकरण कराया था। दो माह गुजर गए। आज तक डाक से डीएल घर नहीं पहुंचा। मालिक ने कहा जब डीएल आएगा तब ड्यूटी पर आना। अब वह बेकार बैठा है, ऐसा ही रहा तो आजिविका चलाना मुश्किल होगा।

केस दो 
नाम संत राम है। स्कूल वैन चलाते है। अस्थाई डीएल को स्थाई बनवाने के लिए डीएल नंबर 1009634319 अप्रैल माह में देवा रोड एआरटीओ कार्यालय जाकर डीएल बनवाया था। नया ट्रैफिक निमय आने के बाद बिना डीएल मालिक ने नौकरी से हटा दिया।

केस तीन
नाम छोटे लाल है। ठेकेकार की गाड़ी चलाते हैं। अगस्त माह में डीएल नवीनीकरण के लिए डीएल नंबर 632067319 पर आवेदन किया। सभी औपचारिकताएं पूरी की। बावजूद आज तक डीएल घर नहीं पहुंचा। अब डीएल के इंतजार में बेरोजगार होकर घूम रहे है।

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