इंटरव्यू: राजनाथ सिंह बोले, फिलहाल पाकिस्तान के साथ बातचीत का कोई सवाल ही नहीं उठता

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान को लेकर भारत के रुख, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद राज्य में जमीनी हालातों के अलावा भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के बारे में बातचीत की। रक्षा मंत्री के इंटरव्यू के कुछ प्रमुख अंश यहां पढ़ें…

सवाल: बहुत सारे विशेषज्ञों ने टू फ्रंट वॉर के स्थिति में भारत की रक्षा क्षमताओं पर संशय व्यक्त किया है। भारत ऐसे किसी परिस्थिति से निपटने के लिए कैसे तैयारी कर रहा है? 

जवाब: हम अपनी सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। लेकिन हमारा मकसद आत्मरक्षा का है न कि किसी देश पर हमला करने और उसके साथ युद्ध करने पर। हमारा यह चरित्र नहीं रहा है और न ही आने वाले भविष्य में ऐसा होगा।

सवाल: भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण में हम कितना आगे बढ़ सके हैं?

जवाब: यह रणनीतिक मामले हैं और पब्लिक में ऐसे मुद्दों पर चर्चा नहीं की जा सकती। मैं आपको यह पक्के तौर पर कह सकता हूं कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान हमारी सेनाओं का आत्मविश्वास और ताकत कई गुना बढ़ी है।

सवाल: क्या भारतीय वायुसेना में जेट फाइटर्स की नई फ्लीट शामिल करने के लिए आपने कोई फैसला लिया है? 

जवाब: भारतीय वायुसेना का अपग्रेडेशन एक जारी रहने वाली प्रक्रिया है। यह क्षमताओं के आंकलन और वित्तिय संसाधनों के आवंटन के आधार पर तय किया जाता है। भारतीय वायुसेना ने उपलब्ध एयरक्रॉफ्ट्स का अपग्रेडेशन शुरू किया है, जिसमें मिग-29, जैगुआर, मिराज-2000 जैसे विमान शामिल हैं। इसके अलावा एलसीए (लाइट कॉम्बैट एयरक्रॉफ्ट), राफेल और सुखोई-30MKI जैसे विमानों के इंडक्शन की प्रक्रिया भी चल रही है। एलसीए एमके 1ए विमान के लिए भी अप्रूवल दिया जा चुका है। वायुसेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए रणनीतिक साझेदारी तंत्र के विकल्प को भी प्रोसेस कर दिया गया है।

सवाल: सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अलग-अलग फोरम पर पीओके का मुद्दा उठाया जाता रहा है। क्या पीओके पर भारत की नीति में कोई बदलाव आया है?

जवाब: भारत का पीओके पर लगातार एक ही स्टैंड रहा है। यह 1994 के संसदीय प्रस्ताव में है। इस प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर के सभी हिस्सों से पाकिस्तान द्वारा कब्जा छोड़ने की बात की गई है।

सवाल: क्या आप एलएसी पर अतिक्रमण के बारे में विस्तार से बता सकते हैं?

जवाब: लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर भारत और चीन के मतों में भिन्नता रही है। समय समय पर एलएसी पर अतिक्रमण की घटनाएं होती रही हैं। भारत और चीन के मध्य बातचीत के ​जरिए किसी भी ऐसी परिस्थिति का सकारात्मक हल निकलाने के लिए एक संस्थागत फ्रेमवर्क है। दोनों पक्षों की आरे से रोजाना अधिकारियों की मीटिंग होती है। फ्लैग मीटिंग होती है और बॉर्डर पर शांति बनाए रखने के लिए अन्य तरीके भी अपनाए जाते हैं।

सवाल: अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के ​बाद क्या कश्मीर में परिस्थितियां सामान्य की ओर लौट रही हैं?

जवाब: हम अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बारे में 1951 से ही हर घोषणा पत्र में कहते आ रहे हैं। लोग कहते थे कि हम सिर्फ चुनावों में इस मुद्दे को उठाते हैं।हमने दिखाया कि हमारी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। हमने राजनीति में विश्वसनियता की कमी को भी दूर करने का काम किया है। पहले की तुलना में अब कश्मीर में परिस्थितियां काफी हद तक सामान्य हो चुकी हैं। बहुत बड़ा बदलाव हुआ है। पाकिस्तान हमें अस्थिर करने के लिए हर तरह के हथकंडे आजमा रहा है। लेकिन परिस्थितियों में सुधार हुआ है। कुछ लोग अब भी कन्फ्यूजन फैलाने का काम कर रहे हैं।

सवाल: कश्मीरी नेताओं को नजरबंद क्यों रखा गया है। उन्हें कब रिहा किया जाएगा?

जवाब: क्या मानवाधिकार का कोई उल्लंघन हुआ है? पहले आतंकवादी मानवाधिकार का उल्लंघन करते थे। किसी सरकार को मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कदम तो उठाना ही था। हमने कुछ एहतियाती कदम उठाए हैं और जल्द ही इसमें ढील दी जाएगी। नजरबंद किए गए अधिकतर नेता पाकिस्तान समर्थक नहीं हैं और नई दिल्ली के साथ उनके अच्छे संबंध हैं।  जम्मू-कश्मीर का नेतृत्व भी इन्हीं नेताओं के हाथ में रहा है। लेकिन वे कश्मीर में स्थिति सामान्य बनाने में विफल रहे।

सवाल: क्या आप पाकिस्तान के साथ बातचीत की कोई संभावना देखते हैं?

जवाब: आज की परिस्थितियों में पाकिस्तान के साथ बातचीत की कोई संभावना नहीं है। इस तरह का कोई सवाल ही नहीं उठता। जैसे पाकिस्तान हरकतें कर रहा और घुसपैठ कराने की लगातार कोशिशें कर रहा ऐसे में बातचीत की कोई संभावना ही नहीं है।

सवाल: आप अपनी सरकार की नौकरियां देने में असफल रहने पर हो रही आलोचना पर क्या कहना चाहेंगे? 

जवाब: यह आरोप बेबुनियाद है। भारत में नौकरियों के लिए मौके बने हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि वैश्विक आर्थिक मंदी का असर भारत पर भी पड़ा है। लेकिन हमारी नीतियों से यह सुनिश्चित हुआ है कि भारत में उपभोक्ता डिमांड उस तरह न प्रभावित हो जैसा कि दुनिया के अन्य हिस्सों में हुआ है।

सवाल: लेकिन आपकी सरकार के ही कई रिपोर्ट्स में आर्थिक मंदी के इशारे मिलते हैं?

जवाब: मैं स्वीकार करता हूं कि आर्थिक मंदी भारत में भी है। लेकिन हमारी सरकार ने इससे निपटने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। अर्थव्यस्था को गति देने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं। हम इसके प्रभाव का आंकलन कर रहे हैं। हम भविष्य में कई और बड़े कदम उठाने के लिए तैयार हैं, जिससे वैश्विक आर्थिक मंदी की चुनौती से निपटा जा सके।

सवाल: क्या आपको लगता है कि रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला हिन्दुओं के पक्ष में आएगा?

जवाब: सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मुद्दे पर टिप्पणी करना सही नहीं होगा।

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