तालिबान ने 11 आतंकियों के बदले तीन भारतीय इंजीनियरों को छोड़ा

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अफगानिस्तान में लगभग 17 महीनों से तालिबानी आतंकियों द्वारा बंधक बनाए गए छह भारतीय इंजीनियरों में से तीन का अपने देश लौटने का रास्ता साफ हो गया है। अफगान तालिबान ने अपने शीर्ष 11 सदस्यों के बदले तीन भारतीय इंजीनियरों को रिहा कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के दो सदस्यों ने बताया कि बंधकों की यह अदला-बदली रविवार को की गई। लेकिन इसको किस जगह अंजाम दिया गया इसकी जानकारी उन्होंने नहीं दी। अफगानिस्तान के उत्तरी बघलान प्रांत स्थित एक ऊर्जा संयंत्र में काम करने वाले सातों भारतीय इंजीनियरों का मई 2018 में अपहरण कर लिया गया था। इनमें से एक बंधक को इस साल मार्च में छोड़ दिया गया था। जिसके बाद वह भारत लौट आया था। जबकि बाकियों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी। इन सभी भारतीयों के नाम का खुलासा नहीं किया गया था।

तालिबान प्रशासन में गवर्नर रह चुके हैं छोड़े गए आतंकी

तालिबान के सदस्यों ने बताया कि तालिबान के शेख अब्दुर रहीम और मावलवी अब्दुर रशीद को भी रिहा किया गया है, जो 2001 में अमेरिका के नेतृत्व वाली सेनाओं द्वारा हटाए जाने से पहले तालिबान प्रशासन के दौरान क्रमशः कुनार और निम्रोज प्रांत के विद्रोही समूह के गवर्नर के रूप में काम कर रहे थे। तालिबान के सदस्यों ने फोटो और फुटेज मुहैया कराई जिसमें उन्होंने दावा किया कि रिहा किए गए सदस्यों का स्वागत किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आतंकियों को राजधानी काबुल के उत्तर में स्थित बगराम सैन्य अड्डे पर अफगानिस्तान की सबसे बड़ी जेलों में से एक से रिहा किया गया।

बिजली सब-स्टेशन लगाने का काम कर थे

जिस समय भारतीयों को बंधन बनाया गया वे बघलान राज्य की राजधानी पुल-ए-खुमरी के पास बाग-ए-शमल के पास एक बिजली सब-स्टेशन लगाने का काम कर रहे थे। भारतीय कर्मचारियों का अफगानिस्तान सरकार के प्रतिनिधि होने के शक में अपहरण किया गया है। ये सभी भारतीय कंपनी केईसी के कर्मचारी थे। किसी भी आतंकी संगठन ने उस समय इनके अपहरण की जिम्मेदारी नहीं ली थी।

अफगानिस्तान के संपर्क में भारत

दूसरी ओर भारत सरकार को भी भारतीय इंजीनियरों की रिहाई के बारे में सूचित नहीं किया गया है। भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि वे अफगानिस्तान सरकार के संपर्क में हैं क्योंकि रिहाई की रिपोर्ट उनके संज्ञान में आई है।  सूत्रों का कहना है कि हमने ये रिपोर्ट देखी है। इस मामले पर अफगानिस्तान के अधिकारियों के साथ संपर्क किया जा रहा है। अगर कोई गतिविधि आगे बढ़ती है, तो इसकी जानकारी दी जाएगी।

अमेरिका और तालिबान के बीच वार्ता में फैसला

अमेरिका के आफगानिस्तान मामलों के विशेष प्रतिनिधि जलमय खलीलजाद और तालिबान प्रतिनिधि का नेतृत्व कर रहे मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के बीच पाकिस्तान में हो रही वार्ता के दौरान यह फैसला लिया गया। बरादार 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान सरकार के निमंत्रण पर बुधवार से इस्लामाबाद में हैं। पिछले साल सितंबर में विशेष प्रतिनिधि नियुक्त होने के बाद अफगानिस्तान में जन्मे खलीलजाद ने तालिबान के साथ चल रहे 17 वर्ष पुराने युद्ध को खत्म करने के लिए सभी पक्षों से मुलाकात की है। गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तालिबान के साथ चल रही शांति वार्ता को रद्द कर दिया था।

पहले भी छोड़े जा चुके हैं भारतीय

इससे पहले 2014 में कैथोलिक प्रीस्ट फादर ऐलेक्सिस प्रेम कुमार को हेरात से अगवा कर लिया गया था और साल 2015 में छोड़ा गया था। वहीं आगा खान फाउंडेशन में काम करने वाली वर्कर जूडिथ डिसूजा को साल 2016 में काबुल से अगवा किया गया था और उन्हें एक महीने में छुड़ा लिया गया था।

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