चांद पर पानी मिला, तो इंसानों को बसाने की उम्मीद जगेगी

0Shares

चंद्रयान-2 के सफलतापूर्वक लांच होने के बाद भारत अंतरिक्ष में एक बड़ी शक्ति के तौर पर स्थापित हो गया है। इस मिशन के दो महत्वपूर्ण मकसद चांद पर पानी की खोज और वहां इंसानों के रहने की कितनी उम्मीदें हैं, का पता लगाना है।

दक्षिणी धुव्र पर लैंडिंग
चंद्रमा का दक्षिणी धुव्र एक ऐसा क्षेत्र है जहां अभी कोई देश नहीं पहुंच सक है। यहां कुछ नया मिलने की संभावना है। वैज्ञानिकों का अंदाजा है कि हमेशा छाया में रहने वाले इन क्षेत्रों में पानी और खनिज होने की संभावना हो सकती है। हाल में किए गए कुछ ऑर्बिट मिशन में भी इसकी पुष्टि हुई है।

यह होगा फायदा
पानी की मौजूदगी चांद के दक्षिणी धुव्र पर भविष्य में इंसान की उपस्थिति के लिए फायदेमंद हो सकती है।
यहां की सतह की जांच ग्रह के निर्माण को और गहराई से समझने में भी मदद कर सकती है।
भविष्य के मिशनों के लिए संसाधन के रूप में इसके इस्तेमाल की क्षमता का पता चल सकता है।

चंद्रयान-1 ने 312 दिन बिताए
चंद्रयान-1 चंद्रमा पर जाने वाला भारत का पहला मिशन था। यह मिशन लगभग एक साल (अक्तूबर 2008 से सितंबर 2009 तक) था। चंद्रयान-1 को चंद्रमा के कक्ष में जाकर कुछ मशीनरी स्थापित करनी थी। साथ ही इसे भारत का झंडा लगाना था और आंकड़े भेजने थे और चंद्रयान ने इसमें से सारे काम लगभग पूरे किए थे।

पहले अभियान से अलग
चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटर था, जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था।
चंद्रयान-2 से भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर उतारेगा।

पानी का पता लगाया था
चंद्रयान-1 जब 2008 में लांच किया गया था तो उसने इस बात की पुष्टि की थी कि चांद पर पानी है।

2022 तक मानव को अंतरिक्ष में भेजने की योजना
चंद्रयान-2 के बाद इसरो की मंशा है कि वह जल्द 2022 तक ‘गगनयान’ से एक भारतीय को भारत की जमीन से और भारत के रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजे।

पहली सफलता
रूस की ओर से 14 सितंबर 1959 में भेजे गए लूना 2 मिशन को चांद तक पहुंचने में पहली बार सफलता मिली। यह पहला एयरक्राफ्ट था जो चांद की सतह तक पहुंच पाया। फिर सोवियत रूस ने 1 नवंबर 1959 को लूना-3 का प्रक्षेपण किया।

तस्वीरें लेकर लौटा नासा
1959 से 1963 तक चांद पर कई मिशन भेजे गए पर इनमें से किसी को भी कामयाबी नहीं मिली। पर 1964 में 30 जुलाई को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा भेजे गए रेंजर -7 को चांद पर उतरने में सफलता मिली।

इंसान का पहला कदम
अपोलो-11 को 16 जुलाई 1969 को कैनेडी स्पेस सेंटर से सुबह 8:32 पर लॉन्च किया गया था। नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने 20 जुलाई को चांद पर कदम रखा था। मिशन को देखने के लिए तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी सुबह 4.30 बजे तक जागती रही थीं।

122total visits,1visits today

2075623total sites visits.
Hello
Can We Help You?
Powered by