इंटरकास्ट मैरिज को प्रोत्साहित कर रही चीनी सरकार, हान और तिब्बती जोड़ा बना मिसाल

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सच्चे प्रेम को दुनिया की कोई ताकत झुका नहीं सकती इस कथन को हान समुदाय के लोंग शी झोंग और उनकी तिब्बती प्रेमिका बा सांग क्वे बा ने सही साबित करते हुए तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने प्रेम को मुकाम पर पहुंचाया और यह दम्पत्ति अशांत तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र क्षेत्र में नस्ली एवं जातीय एकता के आदर्श बने। झोंग और बा ने जिस तरह हान और तिब्बती समुदायों के बीच कट्टर दुश्मनी के कारण अपने प्रेम के समक्ष आई बाधाओं से पार पाया और समाज के नियम को फिर से लिखा, उसे देखकर उन्हें आधिकारिक रूप से ”विजेताओं” (अचीवर्स) के रूप में मान्यता मिली।

अधिकारियों ने बताया कि झोंग और बा को विवाह करने के लिए कई वर्षों इंतजार करना पड़ा और उन्हें अंतत: 2015 में उनके सब्र का फल मिला और वे विवाह बंधन में बंधे। इस समय झोंग और बा दोनों की उम्र करीब 50 वर्ष है और वे चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में प्रेम और जातीय एकता का प्रतीक हैं। उनके विवाह ने सैकड़ों युवाओं को अंतर-समुदाय विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया है जिसे देखते हुए स्थानीय सरकार ने इस दम्पत्ति को नस्ली एकता के लिए ”राष्ट्रीय आदर्श पुरस्कार” से सम्मानित किया।

स्थानीय सरकार के एक अधिकारी सी डान यांगजी ने चीन के निमंत्रण पर तिब्बत आए भारतीय पत्रकारों के समूह से कहा, ”हमारी सरकार तिब्बत और अन्य जगहों पर विभिन्न जातीय समुदायों के बीच एकता को बढ़ावा देने के लिए अंतर-समुदाय विवाहों की नीति को अपना रही है।” एक अन्य अधिकारी ने कहा, ”झोंग और बा ने विवाह करने के लिए कई साल इंतजार किया। उन्हें दोनों समुदायों के निशाने पर आने का डर था, लेकिन झोंग और बा ने मिसाल कायम की जिसके बाद विभिन्न समुदायों के लोगों के बीच होने वाले विवाह के मामलों में तेजी आई है।”

डान ने बताया कि शिगात्से के सामुदायिक केंद्र में 500 परिवार पंजीकृत हैं जिनमें से 40 दम्पत्ति ऐसे हैं जिन्होंने अंतरनस्लीय विवाह किया है। तिब्बती लोगों और चीनी प्राधिकारियों के संबंध उस समय अत्यंत तनावपूर्ण हो गए थे जब चीन की सेना 1950 में तिब्बत में घुस आई थी। बगावत के खिलाफ चीनी सरकार की कार्रवाई के बाद तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा तिब्बत से भाग गए थे और उन्हें भारत ने राजनीतिक शरण दी थी।

चीन के आलोचकों का मानना है कि चीन पिछले 60 साल से हान समुदाय के लोगों को बड़ी संख्या में तिब्बत भेज रहा है ताकि उनकी संख्या स्थानीय जनसंख्या से अधिक हो जाए और तिब्बती सांस्कृतिक विरासत को कमजोर किया जा सके। हालांकि तिब्बत में उपमंत्री रैंक के अधिकारी वांग नेंग शेंग ने इस प्रकार की आलोचनाओं को सिरे से खारिज किया और कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न जातीय समुदायों के बीच एकता बढ़ाने और तिब्बत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की कोशिश कर रही है।

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